पाचन तंत्र के लिए डबल ट्रिपल रामबाण मंडूकासन /मंडूकासन करने के बारे में पूरी जानकारी
मंडूकासन कैसे करें और इसके लाभ, फायदे, नुकसान व सावधानियां क्या है?
मंडूकासन क्या है?
मंडूक एक संस्कृत शब्द है इसीलिए हिंदी में मंडूक का अर्थ है मेंढक और आसन अर्थात मेंढक की आकृति के समान दिखाई देने वाला आसन इसीलिए इस आसन को मंडूकासन कहा जाता है।
इंग्लिश में इसे 'फ्राॅग पोज' कहा जाता है।
☀️12 चरणों वाले सूर्य नमस्कार को कैसे करें?
मंडूकासन चित्र
मंडूकासन के बारे में बताएं?
स्वामी रामदेव के कथानुसार इस आसन को करने से पहले दिन से ही मंडूकासन करने के लाभ मिलने लगते हैं। खराब से खराब स्थिति में भी इस आसन से पच्चीस प्रतिशत तक लाभ मिलता है। बाकी पच्चीस से पचहत्तर प्रतिशत तक लाभ पहले दिन से ही मंडूकासन से मिलने लगता है।
🐍कुंडलिनी जागृत कर देने वाले मत्स्येंद्रासन को कैसे करें?
मंडूकासन कैसे लगाया जाता है?
इस आसन में वज्रासन या सुखासन में बैठकर आगे की ओर झुका जाता है और दोनों हाथ मुट्ठी बंद कर नाभि स्थल पर लगे रहते हैं।
आगे पोस्ट में हम मंडूक आसन की पूरी प्रक्रिया को समझने वाले हैं।
मंडूकासन कौन-सा होता है?
मंडूक आसन पेट के लिए किया जाने वाला आसन है। यह पेट की सब तरह की बीमारियों को ठीक करने के लिए एक कारगर तरीका है। यही कारण है कि स्वामी बाबा रामदेव इस आसन को डेली किए जाने वाले योग के 12 योग आसानों में पहले स्थान पर रखते हैं।
वज्रासन में बैठने पर किसी प्रकार की दिक्कत हो तो सुखासन में बैठकर भी मंडूक आसन किया जा सकता है।
मंडूकासन करने की सही विधि क्या है?
मंडूकासन करने की पहली विधि
1. मोटी चटाई या दरी बिछाकर उस पर वज्रासन में बैठ जाए अर्थात दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर पैर के निचले हिस्से पर कुल्हों को टीकाकार बैठ जाएं।
💪 भुजाओं को बलशाली बनाने के लिए भुजंगासन कैसे करें?
2. इस अवस्था में बाहिनें पैर पर दाहिने पैर का अंगूठा तथा दोनों घुटने सामने से मिले हुऐ हो।
3. अब धीरे धीरे लंबी गहरी साँस लीजिए और इसी तरीके से छोड़ दीजिए। इससे दिमाग शरीर को आराम महसूस कराएं।
4. ऐसे ही साँस दोबारा भरीये और साँसों को छोड़ते हुए पेट को जितना हो सके अंदर खींचे
5. अब दोनों हाथों की मुट्ठियां बंद कीजिए दोनों अंगूठें मुट्ठी के अंदर रखे।
6. अब दोनों हाथों की मुट्ठियां सामने से आपस में 🤜🤛मिलाएं। अंगूठे मुट्ठी के अंदर रहे।
7. अब इन मिलाए हुऐ हाथों को अंगूठे की तरफ से नाभि स्थल से लगाते हुए, आगे की ओर झुके।
8. नाभि पर दोनों मुट्ठियों द्वारा दबाव महसूस करें।
9. पूरा जमीन तक नहीं झुकना है छाती जांघों पर टिकी हो और गर्दन सिर को सीधा रखे।
10. दृष्टि सामने की ओर बनाये।
11. ज्यादा से ज्यादा देर तक साँस रोकने का प्रयत्न करे।
12. साँस रोकने में असमर्थता होने पर उसी अवस्था में धीरे धीरे लंबी गहरी सांसे लीजिए।
13. लगभग एक मिनट का अभ्यास हो जाने पर साँस भरते हुए वापिस आ जाइए।
🙂चेहरे की बढाएं रौनक जाने सर्वांगासन कैसे करें?
14. कम से कम दो बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।
फिर दो बार मंडूकासन की दूसरी विधि जो आगे बताई है उसे दोहराएं।
मंडूकासन करने की दूसरी विधि
1. मंडूकासन की दूसरी विधि में मुट्ठियां बंद करने की बजाय दोनों हाथों को खुला रखकर नाभि स्थल पर लगाया जाता है।
2. इसके लिए बांए हाथ को खुला रखिए इसके उल्टी तरफ दायें हाथ को रख दीजिए। और दोनों हाथों की हथेलियों की सिधाई बराबर रखे।
3. अब ऐसे ही मिले हुए हाथो को नाभि स्थल से लगा दीजिए। बाएं हाथ की हथेली को ध्यान से देखे नाभि के सेंटर से लगी हो।
4. बाकी पूरा प्रोसेस पहली विधि की ही भांति है।
5. इस प्रक्रिया को दो बार दोहराएं।
मंडूकासन योगासन करने के लाभ और फायदे क्या है?
सबसे बड़ा फायदा
- ये पूरे अस्त व्यस्त पाचन तंत्र को दुरस्त करने का काम करता है और सब बीमारियों को अवकाश प्रदान कराता है।
- लिवर, इंटेस्टाइन, पैनक्रयाज, प्रोस्टेट, गर्भाशय, अमाशय, गाॅल ब्लैडर की समस्याओं में काफी लाभदायक है।
- पेट में फंसी हुई जहरीली गैस फटाफट बाहर निकलने लगती है।
मंडूकासन से और क्या फायदा है?
- गैस कब्ज हर्निया कॉन्स्टिपेशन एसिडिटी इनडाइजेशन गैस्टिक की दिक्कतों में विशेषत: उपयोगी है।
- जो लोग मोटापा कम करना चाहते हैं उन्हें आज ही से मंडूकासन का अभ्यास शुरू कर देना चाहिए।
- पीठ में लचीलापन लाकर उसे मजबूत बनाने का काम करता है। तनाव, चिंता कम करने में भी मददगार है।
- हृदय को स्वस्थ रखने के लिए भी बहुत अच्छा योगासन हैं।
सावधानी, नुकसान व मंडूकासन से संबंधित जरूरी बातें
- शरीर में कोई गम्भीर बीमारी, रोग या दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही मंडूकासन करे।
- आसन करते समय किसी प्रकार की जल्दबाजी ना करें। लाभ की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है।
- आसन का मुख्य हिस्सा है नाभि पर मुट्ठियां लगाना, इसे ध्यानपूर्वक सही से करे।
- एक चक्र पूरा करने के बाद कुछ सेकंड का आराम अवश्य लें।
- वैसे मंडूकासन आसान आसनों में से है इसे आप बिना एक्सपर्ट के भी कर सकते हैं।
- नाभि की समस्या रहने वालों को आसन नहीं करना चाहिए।
मंडूकासन के लिए विशेष क्या है?
पेट की हर समस्या के लिए कई रामबाणों की तरह काम करता है। नाभि पर मुट्ठियां और हाथ रखने वाले पार्ट को सही से करे।
मंडूकासन के बाद कौनसा आसन करना चाहिए?
मंडूकासन करने के बाद ऊष्ट्रासन और शशकासन किया जा सकता है।
मंडूकासन से पहले कौनसा आसन करना चाहिए?
मंडूकासन से पहले आप वज्रासन कर सकते हैं या फिर थोड़ा वार्म-अप कर ले तो वह भी ठीक है।
मंडूकासन कितने समय तक या कितनी देर तक और कितनी बार करना चाहिए?
मंडूकासन को एक एक मिनट के लिए कुछ सेकंड के विश्राम के साथ तीन से चार बार तक किया जा सकता है।
मंडूकासन कितने मिनट तक करना चाहिए?
मंडूकासन शुरुआत में चार-पांच मिनट तक कर सकते हैं। एक्सपर्ट हो जाने पर आसानी हो जाने पर आधा घंटा तक कर सकते हैं।
मंडूकासन किसे नहीं करना चाहिए?/मंडूकासन कब नहीं करना चाहिए?
अल्सर, हर्निया या कोई गंभीर रोग, दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह लिए बगैर आसन नहीं करना चाहिए। अगर आप किसी प्रकार की जल्दबाजी में है तो आसन को ना ही करे तो अच्छा है क्योंकि योग में सब साँसों का खेल है।
मंडूकासन कब करना चाहिए?
पेट से संबंधित कोई भी परेशानी होने पर मंडूकासन किया जाना चाहिए मंडूकासन पेट की समस्याओं के लिए रामबाण की तरह काम करता है अगर आप मंडूकासन नियमित तौर पर करते हैं तो मंडूकासन आपके अस्त व्यस्त जीवन के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है