सूर्य नमस्कार व्यायाम कैसे करते हैं के बारे में जानकारी 

सूर्य नमस्कार योगा इमेज
सूर्य नमस्कार योगा इमेज 


सूर्य नमस्कार योग

सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है और जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है सूर्य नमस्कार योगासन एक तरह से सूर्य देव की आराधना ही है। 


ताकि सूर्य जो ऊर्जा का एक विशालकाय स्रोत है उसमें से सूर्य की ऊर्जा का कुछ अंश अपने शारीरिक सामर्थ्य के अनुसार हम अपने शरीर में सूर्य नमस्कार आसन के द्वारा धारण करें जिससे हमारा शरीर बलवान और ऊर्जावान हो। 


वज्रासन करने का तरीका, वज्रासन से रहे कब्ज फ्री 


सूर्य नमस्कार बताइए

सूर्य नमस्कार सभी योगासनों में उत्तम व सर्वश्रेष्ठ है यह अकेला आसन ही शरीर के सभी अंगों को पुष्ट करने में सहायक है इस तरह से सूर्य नमस्कार अकेला आसन ही सभी आसनों के लाभ पहुंचाने में मददगार है। क्योंकि सूर्य नमस्कार में एक साथ बारह आसनों का अभ्यास किया जाता है। 


नित्य प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से शरीर निरोगी और स्वस्थ होता है सूर्य नमस्कार बच्चों से लेकर किसी भी उम्र के साधक द्वारा किया जा सकता है चाहे वह पुरुष हो या स्त्री। 


सूर्य नमस्कार कितनी बार करना चाहिए?

शुरुआती तौर पर सूर्य नमस्कार चार से पांच बार तक करना उचित होता है। समय सीमा के लिहाज से भी चार से पांच मिनट तक कर सकते हैं। 

जब आपको सूर्य नमस्कार सहज महसूस होने लगे तो प्रतिदिन एक एक आसन सूर्य नमस्कार में इजाफा करते चले जाए। 


अगर आप सूर्य नमस्कार अधिक संख्या में करने की सोच रहे हैं तो सूर्य नमस्कार एक दिन में कितनी बार करना चाहिए यह आपकी 💪शारीरिक क्षमता पर निर्भर करेगा। 


क्योंकि बहुत से फरवट व्यक्ति पचास से सौ बार सूर्य नमस्कार प्रतिदिन सहज रूप से कर जाते हैं तो किसी को पांच से दस बार में भी दिक्कत होने लगती है। 


सो बेहतर रहेगा आप खुद से रोजाना सूर्य नमस्कार करते हुए महसूस करे कि आप कितनी बार सूर्य नमस्कार करने के काबिल है 

अगर आप किसी एक्सपर्ट की देख रेख में सूर्य नमस्कार कर रहे हैं तो फिर तो बात ही कुछ और है। 



सूर्य नमस्कार श्लोक

इस श्लोक के जरिए हम सूर्य नमस्कार के लाभ के बारे में जानेंगे-

________

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।

आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

इस श्लोक के माध्यम से हम समझ सकते हैं जो व्यक्ति प्रतिदिन सूर्य नमस्कार योगासन करता है उसकी आयु, बुद्धि व समझ, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है इस प्रकार यह आसन शरीर का संपूर्ण विकास करने में सामर्थ्यवान है। 


आज की आधुनिक बिजी लाइफ स्टाइल में लोगों का सेहत के प्रति ध्यान नहीं जाता है और दूसरा गलत खानपान के चलते लोग तरह-तरह की नई-नई बीमारियों से ग्रसित होते चले जा रहे हैं 


ऐसे में कोई नहीं अगर उन्हें योगासनों के बारे में बोले भी तो वे तरह-तरह के योगासनों के पैकेज को देखकर इनसे मुंह ही फेर लेते हैं ऐसे में सूर्य नमस्कार सिर्फ एक आसन ही लोगों की सभी बीमारियों से घिरे जीवन में अच्छा स्वास्थ्य दे सकने के लिए संजीवनी की तरह काम करता है। 


रोजाना कुछ मिनटों का सूर्य नमस्कार योगासन आपको शारीरिक रूप से बिना बीमारी के सुख पूर्वक जीवन जीने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में काम करता है। 


सूर्य नमस्कार करने का समय और क्या है सूर्य नमस्कार करने के नियम व कायदे 

सूर्य नमस्कार को सुबह खुले, साफ और स्वच्छ व ताजा वातावरण में करना चाहिए। 


सूर्यनमस्कार को करने का सही समय सुबह के वक्त जब सूर्य की किरणें निकलना आरंभ होती है तब करें क्योंकि उस समय सूर्य की किरणें तिरछी होने के कारण हमें विटामिन डी प्राप्त होता है जिससे हमें कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। 


और अल्ट्रावायलेट का प्रभाव ज्यादा ना होने के कारण शरीर को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता और सूर्य जो कि ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है उसका हमारे शरीर को सूर्य नमस्कार के जरिए पूरा लाभ मिलता है। 


सूर्य नमस्कार को आप शाम को सूर्य के छिपने के दौरान भी कर सकते हैं क्योंकि उस समय भी अल्ट्रावॉयलेट रेज़ का ज्यादा प्रभाव नहीं होता और सूर्य की ऊर्जा का हमें सूर्य नमस्कार के दौरान समुचित लाभ मिल पाता है। 


सूर्य नमस्कार करते समय मुख को सूर्य की ओर रखें यानी कि सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर और सूर्यास्त के समय पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। 


सूर्य नमस्कार में कितनी स्थितियां होती हैं? 

सूर्य नमस्कार 12 आसनों व स्थितियों का समूह है प्रत्येक आसन एक विशेष मंत्र के उच्चारण के साथ किया जाता है इस प्रकार से सूर्य नमस्कार करते समय 12 मंत्रों का उच्चारण किया जाता है

____सभी मंत्रों का सूर्य नमस्कार के 12 आसनों(चरणों) के साथ कर्मानुसार विवरण नीचे दिया गया है - - - - - 


सूर्य नमस्कार के सभी 12 मंत्र कौन कौनसे है? 

1. ॐ मित्राय नमः।

2. ॐ रवये नमः।

3. ॐ सूर्याय नमः।

4. ॐ भानवे नमः।

5. ॐ खगाय नमः।

6. ॐ पूष्णे नमः।

7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।

8. ॐ मरीचये नमः।

9. ॐ आदित्याय नमः।

10. ॐ सवित्रे नमः।

11. ॐ अर्काय नमः।

12. ॐ भास्कराय नमः।

13. ॐ श्रीसवितृसूर्यनारायणाय नमः।


सूर्य नमस्कार आसन के समापन पर एक मंत्र अलग से ॐ श्रीसवितृसूर्यनारायणाय नमः। का उच्चारण किया जाता है 


जो भी कोई व्यक्ति रोजाना सूर्य नमस्कार करता है उसका बल, वीर्य, आयु, बुद्धी व समझ और तेज बढ़ता है। 



सूर्य नमस्कार के सभी बारह आसन, उनके नाम और सूर्य नमस्कार करने की विधि 

सूर्य नमस्कार करने से पहले ध्यान रखे कि आपका पेट बिल्कुल खाली हो और शौचादि से निवृत हो चुके हो। 


सूर्य नमस्कार स्टेप्स इन हिंदी

नीचे सूर्य नमस्कार करने के सभी स्टेप्स इमेज के साथ संक्षेप में बताए गए हैं। 

____सूर्य नमस्कार योगा के 12 आसन कौन कौन से हैं?

1. प्रणामासन:- आंखे बंद करके सूर्य की और मुख करके प्रणाम करने की मुद्रा में दोनों हाथों को जोड़े हुए सीधे खड़े हो जाएं, दोनों पैरों को मिलाएं और कंधे तथा कमर को सीधा रखें। 

सूर्य नमस्कार के बारह आसन


2. हस्त उत्तानासन:- अब धीरे धीरे श्वास भरते हुए हाथों को सामने की ओर सीधा रखते हुए, धीरे धीरे सिर के ऊपर से सीधा ले जाते हुए और कमर को रीढ के निचले हिस्से से पीछे की तरफ झुकाते हुए हाथों को भी पीछे की तरफ ले जाएं। कुछ समय ऐसे ही रूकने का प्रयास करें। 


3. उत्तानासन:- अब धीरे-धीरे सांसो को बाहर निकालते हुए साथ ही धीरे धीरे रीढ़ के निचले हिस्से से शरीर को आगे की ओर मोड़ते हुए झुक जाएं। 

Surya namaskar benefits for ladies


इस अवस्था में आपके दोनों हाथ पैरों के दाएं बाएं धरती को स्पर्श करेंगे, घुटने बिल्कुल सीधे रखें सिर को घुटनों के बीच लाएं या माथा घुटनों से स्पर्श करने का प्रयास करें, कुछ समय इस अवस्था में ही रहे


4. अश्व संचालनासन:- इस अवस्था में सांसो को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और मुड़े हुए पंजों पर टिका दें, गर्दन और चेहरे को पीछे की तरफ झुकाते हुए छाती को आगे की ओर ताने इस स्थिति में सांसो को भरे हुए कुछ समय के लिए रुके रहे। 


5. चतुरंग दंडासन:- अब सांसो को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए दाएं पैर को भी पीछे की तरफ ले जाएं, दोनों पैरों को आपस में मिलाएं और दोनों एड़ियों को जमीन से सटाने का प्रयास करें। 

नितंबों को जितना हो सके ऊपर की तरफ उठाएं और गर्दन नीचे की तरफ, ठुड्डी को गले से लगाने का प्रयास करें। 


6. अष्टांग नमस्कार:- अब सांस भरते हुए शरीर को पृथ्वी के साथ साष्टांग दंडवत की स्थिति में लाना है। इसके लिए पहले पंजो, फिर घुटनों बाद में छाती और माथे को हाथ के सहारे जमीन पर टिका दें। नितंबों को जमीन से थोड़ा ऊपर रखे, सांसो को सामान्य रखें। 


7. भुजंगासन:- अब सांसो को धीरे धीरे भरते हुए हथेलियों को जमीन पर रखते हुए, हांथों को सीधा कर दे, पैर पैरों के पंजे से खड़े रहते हुए घुटने जमीन से लगे हुए हो और छाती को ऊपर की ओर खींचते हुए गर्दन और चेहरे को को पीछे की तरफ ले जाएं। 



8. अधोमुक्त श्वानासन:- अब सांसों को बाहर निकालते हुए दोनों पैरों की एड़ियों को आपस में मिलाएं और उन्हें धीरे धीरे जमीन पर सटाने का प्रयास करें। नितंबों को जितना हो सके ऊपर की तरफ उठाएं। हाथ सीधे और गर्दन को अंदर की तरफ गले से सिकोड़े। 


9. अश्व संचालनासन:- इसी अवस्था में सांसो को भरते हुए बाएं पैर को आगे की तरफ ले जाएं और गर्दन और चेहरे को पीछे की तरफ झुकाते हुए छाती को आगे की ओर ताने। इस स्थिति में सांसो को भरे हुए कुछ समय के लिए रुके रहे। 


10. उत्तानासन:- अब धीरे-धीरे सांसो को बाहर छोड़ते हुए आगे की ओर झुकते हुए, हाथों को पैरों के दाएं बाएं जमीन से लगाएं और माथे को घुटनों से लगाने का प्रयास करें। 


11. हस्त उत्तानासन:- अब सांसों को भरते हुए सीधा खड़े होते हुए हाथों को सामने की ओर से सीधा सिर के ऊपर से ले जाते हुए पीछे की तरफ हाथों और गर्दन को झुका दें। साथ ही रीढ़ के निचले हिस्से से शरीर के ऊपरी हिस्से को पीछे की तरफ झुकाने का प्रयास करें। 


12. प्रणामासन:- अब सास को छोड़ते हुए सबसे पहले वाली स्थिति यानी कि प्रणाम आसन में आ जाए। 

अगर आप सूर्यनमस्कार पहली बार ही आरंभ करने जा रहे हैं तो कुछ दिनों के लिए इसे धीरे-धीरे ही करने का प्रयास करें ताकि शरीर की मसल्स में कोई अनावश्यक खिचाव पैदा ना हो, बाद में शरीर के खुलने पर आप आसन को करने की गति बढा सकते हैं। 

लेकिन बेहतर होगा कि आप सूर्य नमस्कार आराम, आनंद और सहजता लेते हुए इस आसन को करें। 



सूर्य नमस्कार के फायदे और सूर्य नमस्कार योगा हमें क्यों करना चाहिए

सूर्य नमस्कार से क्या क्या लाभ होते हैं?

1. शरीर का वजन कम या ज्यादा होने पर उसे बैलेंस करने में मदद करता है। 

2. प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से आयु में बढ़ोतरी होती है। 

3. नियमित तौर से सूर्य नमस्कार करने से शरीर बलवान और वीर्यवान होता है। 

4. भूख बढ़ाने में मदद मिलती है और पाचन समस्या में सुधार होता है। 

5. सूर्य नमस्कार करने से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है। 

6. सूर्य नमस्कार करने से बुद्धि और समझ बढ़ती है। 

7. सूर्य नमस्कार करने से शरीर में लचीलापन आता है। जिससे दैनिक जीवन की सभी गतिविधियों को करने में बिना दर्द के आसानी होती है। 

8. शरीर में रक्त का संचार सुचारू रूप से होने लगता है। 

9. शरीर की मसल्स टोन होती है जिससे शरीर को सही आकार मिलने में मदद मिलती है। 



सूर्य नमस्कार बेनिफिट्स फॉर लेडिज इन हिंदी 

सूर्य नमस्कार नित्य करने से महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता सही होने में मदद मिलती है। 

साथ ही सूर्य नमस्कार त्वचा की रंगत, चेहरे की चमक के साथ साथ, बालों की भी स्मूदनैस को बढ़ाता है। 

साथ के साथ अतिरिक्त शारीरिक चर्बी को कम करके शरीर को आकर्षक बनाता है। 



सूर्य नमस्कार सावधानी, किसे उठाना पड़ सकता सूर्य नमस्कार से नुकसान 

हड्डियों में किसी प्रकार के दर्द या समस्या होने पर इस आसन को करने से बचना चाहिए। महिलाओं को पीरियड्स और गर्भावस्था के दौरान तीसरे महीने के उपरांत इस आसन को नहीं करना चाहिए।

उच्च रक्तचाप के मरीजों को सूर्य नमस्कार करने से बचना चाहिए। 



सूर्य नमस्कार से वजन कैसे बढ़ाए? 

अगर आप सूर्य नमस्कार से वजन बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं तो ऐसा तभी हो सकता है अगर आपका वजन शारीरिक मापदंडों के अनुसार कम हो, 

क्योंकि जरूरत से ज्यादा शरीर का वजन होने पर सूर्य नमस्कार उसे कम भी करता है और जरूरत से कम वजन होने पर यह उसे बढ़ाता भी है। 

कुल मिलाकर देखा जाए तो सूर्य नमस्कार शारीरिक वजन को संतुलित बनाए रखता है।