भुजंगासन कैसे करें? इसके क्या-क्या फायदे हैं? भुजंगासन की विधि, लाभ, नुकसान व सावधानियां। 


भुजंगासन परिभाषा 

भुजंग का अर्थ होता है सर्प। इस योगासन में शरीर की आकृति एक फन फैलाए हुए साँप 'इंडियन कोबरा' की भाँति हो जाती है, इसीलिए इस आसन को भुजंगासन या सर्पासन(cobra pose yogasan) कहा जाता है। 

जमीन पर पेट के बल लेट जाएं और सांसो को भरते हुए व हाथों का सहारा लेते हुए कमर से शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाते हुए चले जाएं और अंत में हाथों को सीधा रखते हुए सिर, कंधों तथा कमर को पीछे की तरफ झुका दे, अब आप भुजंगासन की मुद्रा में होंगे। 

भुजंगासन चित्र 

भुजंगासन कैसे करें
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Bhujangasana steps in hindi 
भुजंगासन कैसे करे, भुजंगासन करने की विधि 

1. साफ-सुथरे चटाई बिछाकर उस पर पेट के बल लेट जाएं। 

2. पैरों को एक दूसरे के समानांतर मिलाए हुए रखें तथा पैरों के पंजों को लंबा फैला कर रखें, पैरों के अंगूठे आपस में मिले हुए हो और दोनों हाथ जांघों के साथ में लगाकर रखें। 

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3. अब धीरे से दोनों हाथों को कोहनी से मोड़ते हुऐ कंधों के समांतर लाए और हथेलियों को जमीन से लगा दे दोनों हाथों पर जोर डालते हुए साथ के साथ धीरे-धीरे श्वास भरते हुए नाभि से लेकर सिर तक शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं। 


4. इस अवस्था में हाथों को बिल्कुल सीधा कर दे तथा सिर को पीछे झुकाते हुऐ और कमर को ऊपर उठाते हुऐ स्ट्रेच करे। 

5. इसी अवस्था में साँस को रोके हुऐ कुछ समय के लिए रुके, अब धीमे धीमे सांस को छोड़ते हुए तथा कोहनियों को मोड़ते हुऐ जमीन से लेट जाए और विश्राम की स्थिति को अपनाए। 

भुजंगासन के फायदे
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6. हाथो को जांघों के साथ में रखे और जमीन से बाएं गाल को सटाते हुऐ सामान्य तौर से आरामदायक गहरी साँस ले। 

7. सांसों की गति सामान्य होने पर फिर से इस आसन का अभ्यास करे। इस तरह से आप भुजंगासन का समुचित लाभ लेने के लिए चार से पांच बार कर सकते हैं।

भुजंगासन करने के क्या क्या फायदे तथा लाभ है? 

  • इस आसन को करने से छाती(सीना) चौड़ी व मजबूत होती है। 
  • फेफड़ों में ऑक्सीजन धारण करने की क्षमता बढ़ती है, जिससे सांसो को लेने में सहजता महसूस होने लगती है। 
  • रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है तथा कमर पतली तथा सुडौल बनती है। 
  • मोटापा कम होता है। 
  • कब्ज और अपच की समस्या में आराम मिलता है, जिससे भूख बढ़ती है तथा बवासीर जैसी बीमारी में भी आराम मिलता है। 
  • इस आसन से पित्ताशय की क्रियाशीलता बढ़ती है और पाचन प्रणाली की कोमल पेशियां मजबूत बनती है। 
  • जिन लोगों को दमा, गला खराब रहने, खांसी व फेफड़ों से संबंधित कोई बीमारी रहती है, तो उन्हें इस आसन करना चाहिए इससे उन्हें लाभ मिलेगा। 
  • भुजाओं को शक्ति मिलती है तथा पीठ की हड्डियों में किसी प्रकार का दर्द रहता है तो उसमें आराम मिलता है। 
  • यह आसन तनाव कम करने वाली एडरनल ग्रंथी को प्रभावित कर उसके स्त्राव में मदद करता है, जिससे तनाव कम होने में मदद मिलती है। 
  • इसके नियमित अभ्यास से इंसुलिन की मात्रा सही बनी रहती है जिससे मधुमेह में काफी फायदा मिलता है। 
  • महिलाओं के लिए यह आसन मासिक चक्र में फायदेमंद होता है यह मासिकधर्म में उन्हें राहत देता है। 

भुजंगासन किन-किन बीमारियों में लाभकारी है? 

फेफड़ों से जुड़ी बीमारी व दमा, खांसी, खराब गला, बवासीर, स्लीप डिस्क, कमर दर्द, मधुमेह, अस्थमा, सायटिका जैसी बीमारियों में भुजंगासन करने से आराम मिलता है। 

भुजंगासन कितने मिनट तक करना चाहिए? 

भुजंगासन कितनी बार करना चाहिए? 

एक क्रम पूरा करने के बाद भुजंगासन के बीच में आराम लेते हुए आप पांच मिनट में पांच से छह बार कर सकते हैं। बाकी आपके साँसों को रोकने की क्षमता पर निर्भर करता है। 

भुजंगासन के बाद कौनसा आसन करना चाहिए? 

भुजंगासन के बाद तिर्यक भुजंगासन, हस्त उत्तानासन, उत्तानासन, अश्व संचालनासन, अधोमुक्त श्वानासन, वज्रासन किए जा सकते हैं। 

भुजंगासन के आपको क्या नुकसान उठाने पड़ सकते हैं तथा भुजंगासन करते वक़्त क्या सावधानी बरतें। 

  • आसन को जल्दी जल्दी करने का प्रयास ना करे, जिससे आपको भुजंगासन से फायदे की जगह किसी प्रकार का नुकसान ना उठाना पड़े। 
  • आसन को सुबह के समय खाली पेट करे, ध्यान रहे आप शौचादि से निवृत्त हो चुके हो। 
  • पेट या पीठ में किसी प्रकार का रोग या दर्द हो तो आसन को न करे।
  • गर्भधारण महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।