अर्ध मत्स्येन्द्र आसन करने का क्या तरीका है? 

अर्ध मत्स्येन्द्र आसन करने का तरीका
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अर्ध मत्स्येन्द्रासन योगासनों में अत्यंत महत्वपूर्ण आसन है, जिसे योगी मत्स्येन्द्रनाथ के नाम पर रखा गया है जोकि भारतीय संस्कृति में एक महान योगी हुए हैं। 

और आज आप इस योग और प्राणायाम की पोस्ट में जानेंगे अर्ध मत्स्येन्द्रासन करने का तरीका क्या है। इसे कैसे करते हैं? 

अर्ध मत्स्येन्द्रासन योगी मत्स्येन्द्रनाथ उनका प्रिय आसन था। इस मुद्रा में वे ध्यान मग्न रहते थे। 

अन्य आसनों की तुलना में अर्ध मत्स्येन्द्रासन इतना आसान नहीं है, शुरुआत में अर्ध मत्स्येन्द्रासन को करने में कठिनाई आती है लेकिन एक बार किसी भी व्यक्ति द्वारा अभ्यस्त हो जाने पर, यह आसन आसानी से होने लगता है। 

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इस आसन को करने से मुख्य रूप से किडनी, लिवर और अग्न्याश्य(पैनक्रयाज) प्रभावित होते हैं। जिससे शरीर में केमिकल कम्पोजिशन संतुलित रहता है, मधुमेह काबु में रहता है। 

इस आसन को करते समय पैरों और हाथों पर ज्यादा दबाव बना रहता है। 

अर्ध मत्स्येन्द्र आसन करने की विधिवत व्याख्या इन हिंदी 


1. खुले स्वच्छ, हवादार और पेड़-पौधों वाले वातावरण में साफ सुथरी जगह पर चटाई या दरी बिछाकर दंडासन में बैठ जाएं। 

2. अब दायें पैर को मोड़ते हुए इसके तलवे को बाईं जांघ के नीचे सरकाते हुऐ बायें कूल्हे(नितंब) से सटा दें। 

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3. इस अवस्था में आपका दायां पूरा पैर जमीन से लगा होगा। 

4. अब बाएं पैर को मोड़ते हुए घुटने को ऊपर की ओर खड़ा कर दें और इस पैर को उठाते हुए इसके तलवे को दायें पैर के घुटने के दूसरी ओर लाकर जमीन पर रख दें। 

अर्ध मत्स्येन्द्र आसन करने के फायदे
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(कृपया किसी प्रकार की जल्दबाजी न करते हुए फ्री माइंड के साथ अर्ध मत्स्येन्द्र आसन करे) 

5. अब दायें हाथ से बाएं घुटने को दबाते हुए(बाएं घुटने के दूसरी ओर से हाथ ले जाते हुऐ) दाएं घुटने पर हाथ थमा दें या बाएं पैर के पंजे पकड़ ले। 

अब बाएं हाथ को थोड़ा पीछे ले जाते हुए जमीन पर टिका ले। 

6. अब साँस छोड़ते हुए, दाएं हाथ से घुटने को दबाते हुऐ तथा दोनों हाथों पर दबाव लेते हुए धड़ और गर्दन को यथासंभव बाईं ओर मोड़े। 

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7. बाएं कंधे को देखने का प्रयास करें तथा इस स्थिति में सामान्य रूप से लंबी गहरी सांसागमन(श्वास प्रश्वास) करते रहे। 

8. रीढ़ सीधी रखें।

9. अब आप अर्धमत्स्येन्द्रासन में है। 

10. कम से कम तीस सेकंड इसी अवस्था में रुकने के बाद क्रमबद्ध तरीके से वापस दंडासन की स्थिति में आ जाएं। 


कुछ सेकंड के लिए लंबी गहरी साँसों के साथ विश्राम ले। 


अब इस पूरी प्रक्रिया को दूसरी तरफ से भी दोहराएंगे। 

अर्धमत्स्येन्द्रासन दूसरी तरफ से 


1. बाएं पैर को मोड़ते हुऐ दाएं कुल्हे से सटा दें। 

अब दाएं पैर को मोड़ते हुए घुटने को ऊपर की ओर खड़ा कर दें और इस पैर को उठाते हुए इसके तलवे को बायें पैर के घुटने के दूसरी ओर लाकर जमीन पर रख दें। 

2. अब बायें हाथ से दाएं घुटने को दबाते हुऐ(दाएं घुटने के दूसरी ओर से हाथ ले जाते हुऐ) बाएं घुटने पर हाथ थमा दें या फिर दाएं पैर के पंजे पकड़ ले।

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अब दाएं हाथ को थोड़ा पीछे ले जाते हुए जमीन पर टिका ले। 

3. अब साँस छोड़ते हुए तथा दोनों हाथों पर दबाव लेते हुए धड़ और गर्दन को यथासंभव दाईं ओर मोड़े।

4. बाएं कंधे को देखने का प्रयास करें तथा इस स्थिति में सामान्य रूप से सांसागमन(श्वास प्रश्वास) करते रहे। 

5. कम से कम पन्द्रह बीस सेकंड इसी अवस्था में रुकने के बाद क्रमबद्ध तरीके से वापस दंडासन की स्थिति में आ जाएं। 

6. अब आप अर्धमत्स्येन्द्रासन का एक चक्र पूरा कर चुके हैं। 


अर्ध मत्स्येन्द्र आसन करने की वीडियो 

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पैनक्रयाज से लेकर किडनी तक किन-किन अंगों को पहुंचता है लाभ और अर्ध मत्स्येन्द्र आसन करने का हमारे शरीर का क्या होगा फायदा 

फायदे व लाभ 

  • इस आसन से मुख्य रूप से यकृत(लिवर) और पैनक्रयाज(अग्नाशय) की खराब स्थिति में सुधार आता है। जिससे शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा निर्माण होने लगता है। अगनाशय द्वारा सही मात्रा में इंसुलिन हार्मोन का स्राव होने लगता है। जिससे शरीर में तरह तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए क्षमता विकसित हो जाती है। और शरीर जल्दी से बीमार नहीं पड़ता। 
  • अर्ध मत्स्येन्द्रासन से किडनी(वृक्क गुर्दों) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे शरीर से अपशिष्ट पदार्थो के निष्कासन से शरीर डिटाॅक्सिफाई सही से होने लगता है। 


ये भी है फायदे 

  • फेफड़ों में खिंचाव होने के कारण उनमें आक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। 
  • मेरुदंड मजबूत व लचीला बनता है। 
  • आंतों की मालिश होती है खासकर के बड़ी आंत और कब्ज की शिकायत में राहत मिलती है। 
  • पैरों, कुल्हों, कंधों की मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूती मिलती है। 


सावधानी व अर्ध मत्स्येन्द्रासन हमें किस तरह की परिस्थितियों में नहीं करना चाहिए। 

पहली बार अर्ध मत्स्येन्द्रासन करते हुए ज्यादा खींचतान ना करें या फिर किसी एक्सपर्ट की देखरेख में करें। 

पेप्टिक अल्सर और हर्निया से ग्रस्त मरीजों को अर्धमत्स्येन्द्रासन नहीं करना चाहिए। 

स्लिप्ड डिस्क में अर्ध मत्स्येन्द्र आसन से परहेज करे। 

हाल ही में कोई सर्जरी हुई है तो आसन से दूरी बनाए। 

रीढ़ की हड्डी में गम्भीर समस्या होने पर आसन को न करे। 

घुटने, हाथों, गर्दन या अन्य किसी प्रकार का दर्द शरीर में हो तो आसन से परहेज करे। 

गर्भावस्था के दो महीने बाद महिलाएं आसन को न करें।   


अर्ध मत्स्येन्द्रासन कितनी बार करना चाहिए 

अर्ध मत्स्येन्द्रासन को शुरूआत में एक बार ही करना चाहिए। अभ्यस्त होने पर आप पांच बार तक इस आसन को कर सकते हैं। 


अर्ध मत्स्येन्द्र आसन में क्या नुकसान उठाना पड़ सकता है? 

अगर आप अर्ध मत्स्येन्द्र आसन पहली बार कर रहे हैं तो जान बूझकर शरीर में ज्यादा खींचतान करने से बचें नहीं तो हो सकता है

आपको पैरों, कुल्हों, कमर की नसों व हड्डियों में किसी प्रकार का दर्द रह जाए। 

इसीलिए अगर आसन को करते समय कोई कठिनाई आती है एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें। 


अर्ध मत्स्येन्द्रासन कितने समय तक करना चाहिए? 

अर्ध मत्स्येन्द्रासन दोनों तरफ तीस-तीस सेकंड से एक मिनट तक कर सकते हैं। 


अर्ध मत्स्येन्द्रासन कितनी बार करना चाहिए? 

अर्ध मत्स्येन्द्रासन को शुरूआत में एक बार ही करना चाहिए। अभ्यस्त होने पर आप पांच बार तक इस आसन को कर सकते हैं।