दोस्तो किसी भी कार्यक्रम की शुरुआत कुछ ऐसे अच्छे शब्दों से की जानी चाहिए जिससे कार्यक्रम में आए लोगों को अच्छी सी खुशी महसूस हो ऐसे में कुछ करतब, मजाकिया और हौसला बढ़ा देने वाली शायरी से शुरुआत हो जाए तो माहौल में अलग ही समा बंध जाए। तो दोस्तों इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम आपके लिए शुरुआती anchroing के लिए कुछ बेहतरीन शायरी लाए हैं इनका लुत्फ उठाए।
एंकरिंग के लिए शायरी
स्कूल मंच संचालन शायरी,
एंकरिंग के लिए शायरी Funny,
मंच संचालन स्वागत शायरी,
मंच संचालन के लिए चुटकुले,
राजनीतिक मंच संचालन शायरी,
संगीत कार्यक्रम के लिए शायरी,
कार्यक्रम की शुरुआत के लिए शायरी,
ताली बजाने के लिए शायरी,
दर्शकों के लिए शायरी,
श्रोताओं के लिए शायरी,
निकाल दे अपने dil से हर डर को,
नजारे मिलेंगे नए फिर तेरी नजर को,
दामन भर जाएगा sitaro से तेरा,
ये दुनिया देखेगी तब तेरे उभरते हुनर को
ये नज़रे न होती ये nazara न होता,
ये नज़रे न होती ये नज़ारा न होता।
आप जैसी महफ़िल न होती,
तो हमारा यहाँ आना gwara न होता।”
वो खुद ही नाप लेते हें बुलंदी aasmano की,
परिंदों को नहीं तालीम दी जाती उड़ानों की…२
महकना और महकाना तो काम है खुशबु का,
खुशबु नहीं मोहताज़ होती kadardano की…२
पूजा हो मंदिर Me तो thali भी चाहिए,
गुलशन Hai गुल का तो mali भी चाहिए है,
दिल Hai दिलवाला तो dilwali भी चाहिए,
कार्यक्रम Hai हमारा तो आपकी tali भी चाहिए…
आज के दिन को सर झुकाकर करें सज़दा
मन की उमंगों को पँख लग जायेंगे
भर लिया ख़ुद को दुआओं से इस दिन
तो दूसरों के लिए भी दुआ कर पाएंगे
शाम सूरज को dhalna सिखाती है
शमा परवाने को jalna सिखाती हैं,
गिरने वालो को होती है तकलीफ
पर ठोकर ही इंसान को chalna सिखाती है
मन मचल के mor होना चाहिए,
इस शानदार सी शाम में थोडा shor होना चाहिए….
दिखाने को तो हम रात भर डांस दिखाए आपको,
मगर आपकी तालियों में भी थोडा jor होना चाहिए
ऐ खुदा अपनी अदालत में हम सबके लिए ज़मानत रखना,
हम रहे या ना रहें, हमारे दोस्तों को यूँ ही सलामत रखना।
अपनी कद्रदानी को,
इस तरह Naa छिपाइए,
अगर प्रस्तुति पसंद आई Ho,
तो तालियाँ बजाइये…।
यकीन नहीं अगर तुझे तो aajma के देख ले
एक बार तू जरा मुस्कुरा के देख ले,
जो ना सोचा होगा तूने वो भी मिलेगा तुझको
बस एक बार अपना कदम आगे badha के तो देख ले।
मुद्दत Se आता हर दिन
ज़िन्दगी Me नई ummid जागे
आज Ka दिन बख्शे खुशियां आपको
नेक कामों Se सबके naseeb जागे
दुनियां का हर शौक pala नहीं जाता,
कांच के खिलोनो को uchhala नहीं जाता |
महनत करने से हो जाती है मुश्किले आसान,
क्यों की हर कम तक़दीर पर tala नहीं जाता ||
शब्दों Ka वजन तो हमारे बोलने के भाव से पता चलता हैं,
वैसे तो, दीवारों Par भी “वेलकम” लिखा होता हैं।
कौन पहुंचा है कभी अपनी आखरी मंजिल तक,
हर किसी के लिए थोडा आसमान बाकि है…
ये तुझको लगता है तू उड़ने के काबिल नहीं,
सच तो ये है की तेरे पंखों में अभी भी उड़न बाकि है।।
शब्दों के इत्तेफाक़ में
यूँ बदलाव करके देख
तू देख कर न मुस्कुरा
बस मुस्कुरा के देख
चेहरे पर हंसी और दिल Me खुशी होती है
सही मायनों Me यही जिंदगी होती है
और हंसना किसी इबादत Se कम नहीं
किसी और Ko हंसा दो तो बंदगी होती है
भ्रमर परागों पर बैठेगें धरी रहेगी रखवाली,
खुश्बू ख़ुद उड़ने को आतुर क्या कर लेगा जी माली,
हम तो खुशी बांटने आये, खुशी बांटकर जायेंगे,
चलो बजा दो सारे मिलकर, एक बार खुलकर ताली…
मंजिल यूँ ही नहीं मिलती राही को,
जुनून से दिल मे जगाना पड़ता है।
पूछा चिड़िया को की घोंसला कैसे बनता है,
वो बोली तिनका तिनका उठाना पड़ता है………
अंदाज़ ऐसे हों की किसी के गले का हार बन जाए
जिस महफ़िल में चले गए वो महफ़िल परिवार बन जाए
किसी ख़ास त्यौहार पर ही जाने क्यों होती हैं खुशियां
जीना ऐसा हो की अपना हर दिन त्यौहार बन जाए
ग़र ख़ुद के साथ ज़ीना आ जाये
टूटे हुओं के ज़ख्मो को सीना आ जाये
हर पल बरसती है नियामतें कायनात की
बस हर दिन की मुबारक देना आ जाए
गिर गिर गिरके यारों मुझको खूब संभलना आता Hai
जलकर बुझना आता Hai बुझ कर जलना आता Hai
अपने ही किस्मत लिखता हूं खुद अपने ही हाथों
मुझको सारी महफिल का अंदाज बदलना आता Hai
गिर गिर गिरके यारों मुझको खूब संभलना आता Hai
जलकर बुझना आता Hai बुझ कर जलना आता Hai
अपने ही किस्मत लिखता हूं खुद अपने ही हाथों
मुझको सारी महफिल का अंदाज बदलना आता Hai
ख़ुद से हो जाये मुहब्बत ऐसा कुछ इज़ाद करें
ख़ुद के ही विचारों से ख़ुद को आबाद करें
नफरत छोड़ आज के दिन मना लें खुशियां इतनी
कल ना रहें तो पंछी भी चहक चहक कर याद करें
तुमको मिल सकता Hai मुझसे बेहतर तो
हमको मिल सकता Hai तुमसे बेहतर
लेकिन तुम और Hum ग़र मिल जाएं तो
कुछ और नहीं Ho सकता इससे बेहतर।
इम्तिहान समझकर
सारे गम सहा करो
शख़्सियत महक उठेगी
बस खुश रहा करो
बिन बूंदो के बारिश ka एहसास कैसे होगा,
जूनून हो Dil में जिसके वो हताश कैसे होगा,
कार्यक्रम के इस रंग Ka मिज़ाज़ कैसा है,
बिन ताली के हमें यह एहसास Kaise होगा
कुछ परिंदे उड़ रहे Hai आँधियों के सामने,
उनमें ताकत Naa सही पर होसला होगा ज़रूर।
इसी तरह तक आगे बढ़ते रहे तो देखना,
तय समंदर तक Ek दिन फासला होगा ज़रूर।।
अपनी एक ज़मी, अपना एक आकाश पैदा कर,
तू अपने लिए एक नया इतिहास पैदा कर…
मांगने से कब मिली है ख़ुशी मेरे दोस्त,
तू अपने हर कदम पर विश्वास पैदा कर।।
दिन निकला Har दिन जैसा
पर आज Ka दिन कुछ ख़ास हो
अपने लिए तो जीते Hai रोज
आज सबके भले Ki अरदास हो।
तौड़ Ke हर एक पिंजरा उड़ चलो आसमा की और,
चाहे लाख लगा Le कोई बंदिशें, तौड़ दो हर एक छोर…
करना Hai हर सपने को पूरा
हर सुबह एक नई शुरुआत लाती है
पुरे दिन के नेक संकल्प सजाती है
जिसने जाना हर दिन है होता शुभ
ये सुबह उसी को ख़ूबसूरत बनाती है
दिलों में विश्वास पैदा करता Hai,
हम सुब में कुछ आस पैदा करता Hai…
मिटटी की बात तो अलग Hai,
इश्वर तो पत्थरों में भी घास पैदा करता Hai।।
%20(20).jpeg)
%20(17).jpeg)
.jpeg)
%20(19).jpeg)
%20(17).jpeg)
%20(19).jpeg)